पिथौरागढ़– जिला कार्यालय सभागार में जिलाधिकारी आशीष भटगांई की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा-17 के अंतर्गत आयोजित की गई। बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के व्यक्तियों के विरुद्ध होने वाले अत्याचारों की रोकथाम, अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन तथा पीड़ितों को समयबद्ध न्याय एवं निर्धारित सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक के दौरान पुलिस विभाग द्वारा विगत चार वर्षों में अधिनियम के अंतर्गत की गई कार्रवाई, दर्ज मामलों एवं उनकी अद्यतन प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही विशेष लोक अभियोजक (सरकारी अधिवक्ता) द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं न्यायालय में मामलों की प्रभावी पैरवी की स्थिति पर भी चर्चा की गई।
जिलाधिकारी ने अत्याचार की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हीकरण किए जाने, पीड़ितों को नियमानुसार मुआवजा वितरण की स्थिति तथा प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने में होने वाले विलंब के कारणों एवं उनके समाधान के संबंध में संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली।
इसके अतिरिक्त अधिनियम के नियम-7(2) के अंतर्गत निर्धारित 60 दिनों की समय-सीमा में विवेचना पूर्ण किए जाने, विगत वर्ष में मामलों में लगाई गई अंतिम रिपोर्ट (एफआर) तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से जागरूकता शिविर आयोजित किए जाने के संबंध में भी विस्तार से चर्चा की गई।
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने, पीड़ितों को समयबद्ध सहायता एवं मुआवजा उपलब्ध कराने तथा मामलों में अनावश्यक विलंब न होने देने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा तथा उन्हें न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी से कार्य करना सुनिश्चित करें।
बैठक में पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रहलाद कोंडे सहित समिति के सदस्य तथा समाज कल्याण विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।



