पिथौरागढ़

ऐतिहासिक जौलजीबी मेले की तैयारियां तेज, 14 नवंबर से काली-गोरी नदी के संगम पर सजेगा अंतरराष्ट्रीय मेला

पिथौरागढ़: जिलाधिकारी आशीष भटगांई के निर्देशों के क्रम में अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने आगामी 14 नवंबर 2026 से आयोजित होने वाले ऐतिहासिक एवं अंतरराष्ट्रीय जौलजीबी मेले की तैयारियों को लेकर मेला स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मेला समिति के पदाधिकारियों एवं मेले से जुड़े विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठक की। बैठक में मेले के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन के संबंध में सुझाव प्राप्त करने के साथ ही आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान अपर जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी धारचूला एवं मेलाधिकारी आशीष जोशी से मेले की तैयारियों एवं विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल, विद्युत, शौचालय, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित व्यवस्थाएं 11 नवंबर तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कर ली जाएं। साथ ही मेले से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियां समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मेले में आने वाले व्यापारियों, स्थानीय नागरिकों एवं देश-विदेश से पहुंचने वाले आगंतुकों की सुविधाओं एवं सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने को कहा।

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बैठक में विभिन्न स्टेकहोल्डर्स द्वारा मेले के आयोजन, व्यापारिक गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर अपने सुझाव रखे गए। अपर जिलाधिकारी ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वस्त किया कि प्राप्त सुझावों के अनुरूप मेले की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाएगा, ताकि इस वर्ष मेले का आयोजन पूर्व वर्षों की भांति सुव्यवस्थित एवं आकर्षक ढंग से संपन्न कराया जा सके।

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इस वर्ष जौलजीबी मेले को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। भारत-चीन सीमा व्यापार को लेकर हाल ही में बनी सहमति के बाद छह वर्ष के अंतराल के पश्चात मेले में तिब्बती उत्पादों की दुकानें सजने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में अधिक व्यापारियों के मेले में प्रतिभाग करने की संभावना है।

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मेले की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन द्वारा स्वयंसेवकों की टीम गठित करने, दर्शक दीर्घा को व्यवस्थित करने तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं।

उल्लेखनीय है कि काली एवं गोरी नदियों के पावन संगम पर आयोजित होने वाला जौलजीबी मेला सीमांत क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं व्यापारिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह मेला भारत, नेपाल और तिब्बत के साथ पारंपरिक व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की गौरवशाली विरासत को भी दर्शाता है।

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