पिथौरागढ़। उत्तराखंड की राजनीति में पिथौरागढ़ विधानसभा सीट हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। इस सीट पर अब तक कांग्रेस और भाजपा के बीच ही मुख्य मुकाबला देखने को मिलता रहा है, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियों ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। एक ओर उत्तराखंड के वरिष्ठ नेताओं में शामिल काशी सिंह ऐरी ने उत्तराखंड क्रांति दल UKD की ओर से पिथौरागढ़ विधानसभा में चुनावी शंखनाद कर दिया है, तो दूसरी ओर 2022 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके नितिन मरकाना ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इन दोनों घटनाक्रमों ने पिथौरागढ़ की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित मुकाबले को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
प्रकाश पंत के दौर से मयूख महर तक, ऐसा रहा चुनावी इतिहास
पिथौरागढ़ विधानसभा का चुनावी इतिहास देखें तो यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच लगातार राजनीतिक मुकाबला रहा है। वर्ष 2002 में भाजपा के प्रकाश पंत ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2007 में भी प्रकाश पंत ने अपनी जीत दोहराई। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मयूख महर ने भाजपा के प्रकाश पंत को हराकर सीट कांग्रेस के खाते में डाली। वहीं 2017 में भाजपा के प्रकाश पंत ने एक बार फिर वापसी करते हुए जीत दर्ज की। वर्ष 2019 में प्रकाश पंत के निधन के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा की चंद्रा पंत ने कांग्रेस की अंजू लुंठी को पराजित किया। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मयूख महर ने भाजपा की चंद्रा पंत को 6,054 मतों से हराकर सीट पर कब्जा जमाया।
2022 में निर्दलीय नितिन मरकाना ने भी खींचा था ध्यान
2022 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे नितिन मरकाना को 6,585 मत मिले थे। अब उनके भाजपा में शामिल होने से उनकी आगे की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
काशी सिंह ऐरी की एंट्री से मुकाबले में तीसरा राजनीतिक आयाम
उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी का पिथौरागढ़ विधानसभा से चुनावी शंखनाद करना भी इस बार के राजनीतिक घटनाक्रम का अहम हिस्सा माना जा रहा है। उत्तराखंड राज्य आंदोलन और क्षेत्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले ऐरी की चुनावी सक्रियता से UKD की भूमिका पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
पिथौरागढ़ विधानसभा में उत्तराखंड क्रांति दल की सक्रियता के साथ ही वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी की उम्मीदवारी ने राजनीतिक चर्चाओं को नया आयाम दे दिया है। ऐरी कोई नया राजनीतिक चेहरा नहीं हैं, बल्कि उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर उत्तराखंड राज्य आंदोलन तक पहुंचा है।
वर्ष 1979 में उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना से जुड़े रहे काशी सिंह ऐरी वर्ष 1985, 1989 और 1993 में अविभाजित उत्तर प्रदेश की डीडीहाट विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद वर्ष 2002 में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद कनालीछीना विधानसभा सीट से विधायक बने। इस तरह वह चार बार विधानसभा पहुंच चुके हैं।
उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके ऐरी की पिथौरागढ़ विधानसभा से चुनावी दावेदारी को क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में इस बार पिथौरागढ़ की चुनावी चर्चा केवल कांग्रेस और भाजपा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि UKD की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में आ गई है।
अब जनता के मुद्दों पर होगी सियासी चर्चा!
पिथौरागढ़ विधानसभा में आगामी चुनाव को लेकर अब कई सवाल सामने हैं। क्या कांग्रेस अपनी पिछली जीत को दोहरा पाएगी? क्या भाजपा दोबारा विधानसभा सीट हासिल करने के लिए नया राजनीतिक समीकरण तैयार करेगी? और क्या UKD अपनी क्षेत्रीय राजनीति के दम पर मुकाबले में अपनी जगह बना पाएगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी मैदान में सामने आने वाले प्रत्याशियों से मिलेंगे। फिलहाल इतना तय है कि पिथौरागढ़ विधानसभा में चुनावी सरगर्मियां शुरू हो चुकी हैं। अब निगाहें राजनीतिक दलों की रणनीति, स्थानीय मुद्दों और जनता के बीच होने वाली चर्चाओं पर टिकी हैं।



