पिथौरागढ़

PM आवास योजना की सूची पर उठे सवाल, विण के गणकोट में पात्र गरीब परिवारों के नाम गायब होने का आरोप

पिथौरागढ़। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की स्वीकृत लाभार्थी सूची के अनुमोदन के लिए जिले की सभी ग्राम पंचायतों में खुली बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इस बीच कई स्थानों से पात्र परिवारों के नाम सूची में शामिल नहीं होने की शिकायतें सामने आने लगी हैं। प्रशासन की ओर से मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी ने वीडियो संदेश के माध्यम से स्पष्ट किया है कि यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम सूची में नहीं है तो ग्राम पंचायत की खुली बैठक में उसका प्रस्ताव रखा जाए, ताकि नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सके।

इधर, जिले की निकटवर्ती विकास खण्ड विण के ग्राम पंचायत गणकोट के पूर्व ग्राम प्रधान नीरज कुमार ने स्वीकृत सूची पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ग्राम में प्रत्येक पात्र परिवार का सर्वेक्षण किया गया था, लेकिन जिन परिवारों की आर्थिक एवं आवासीय स्थिति सबसे अधिक दयनीय है, उनमें भगीरथ कुमार, नंदा देवी, कुछ विकलांग और दिव्यांग परिवारों के नाम स्वीकृत सूची में शामिल नहीं हैं।

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पूर्व ग्राम प्रधान का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऑनलाइन सर्वेक्षण में प्रथम प्राथमिकता के पात्र परिवारों के नाम आखिर सूची से कैसे गायब हो गए। उन्होंने मांग की है कि संबंधित उच्चाधिकारी इन परिवारों की वास्तविक स्थिति का स्थलीय निरीक्षण करें और यदि वे पात्र पाए जाते हैं तो उन्हें शीघ्र प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाए।उन्होंने कहा कि इन परिवारों को बरसात में कई समस्याओं से गुजरना पड़ रहा है।

पथरीले मकानों में पन्नी डालकर अपना जीवन यापन कर रहे है, आये दिन बंदरो द्वारा उस पन्नी को भी फाड़ दिया जा रहा है, प्रशासन से गुहार लगाई है मकान की लिष्ट से नाम तो गायब है, इस बरसात से निपटने हेतु तिरपाल ही उपलब्ध करा दी जाए,जिससे बरसात के समय परिवार पानी के झरने से निजात पा सके।

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उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम में कुछ अराजक तत्व प्रभावित परिवारों को यह कहकर बरगला रहे हैं कि उन्हें हमेशा के लिए मकान से वंचित रहना पड़ेगा, जबकि उन्हें विश्वास में लेकर सही जानकारी दी जानी चाहिए। पूर्व ग्राम प्रधान ने जिला प्रशासन से प्रभावित परिवारों से जानकारी जुटाकर ऐसे अराजक तत्वों की पहचान करने और उनके खिलाफ कड़ी आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन परिवारों के साथ न्याय नहीं हुआ तो सभी प्रभावित परिवारों को साथ लेकर जिला मुख्यालय में धरने पर बैठा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। साथ ही उन्होंने मांग की है जिन परिवारों के नाम सूची में नहीं आए हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से बताया जाए कि उनका नाम किन कारणों से स्वीकृत सूची में शामिल नहीं हो सका। उनका कहना है कि वर्षों से पक्के मकान की आस लगाए बैठे गरीब परिवार स्वीकृत सूची आने के बाद भी अपने सपनों को टूटता हुआ देख रहे हैं।

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अब सभी की निगाहें ग्राम पंचायतों में आयोजित होने वाली खुली बैठकों पर टिकी हैं, जहां स्वीकृत सूची का अनुमोदन किया जाएगा और छूटे हुए पात्र परिवारों के नामों पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द उक्त परिवारों की वास्तविक स्थिति का वीडियो जारी किया जाएगा,जिसमें इस डिजिटल युग में ये परिवार कैसे अपना जीवन यापन कर रहे है उसे दिखाया जाएगा।

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