पिथौरागढ़

किसानों के लिए बड़ी सलाह: औषधीय पौधों की खेती बन सकती है गेम चेंजर

जनपद में स्थानीय उत्पादों एवं सेवाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच प्रदान करने के उद्देश्य से District as Export Hub (DEH) पहल के अंतर्गत गठित जिला निर्यात संवर्धन समिति (District Export Promotion Council-DEPC) की बैठक आज जिलाधिकारी आशीष भटगांई की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

बैठक में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा संचालित District as Export Hub (DEH) पहल के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

महाप्रबंधक जिला उद्योग कविता भगत ने बताया कि डीईएच पहल के तहत जनपद में निर्यात की संभावनाओं वाले उत्पादों एवं सेवाओं की पहचान कर उनके विकास, मूल्य संवर्धन एवं विपणन के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए तैयार की गई जिला निर्यात कार्ययोजना (District Export Action Plan-DEAP) के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड की पाँचों लोकसभा सीटों पर कौन कितने वोट से आगे......

जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने निर्देश दिए कि जिला निर्यात संवर्धन समिति की नियमित बैठकें आयोजित कर अभियान की सतत समीक्षा की जाए तथा जनपद में चिन्हित निर्यातोन्मुख उत्पादों एवं प्राथमिकताओं के आधार पर कार्ययोजना बनाकर उसका समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने जनपद में एरोमैटिक एवं मेडिसिनल प्लांट्स (सुगंधित एवं औषधीय पौधों) की खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि इन फसलों के उत्पादन, प्रसंस्करण एवं निर्यात को लेकर एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में एरोमैटिक एवं औषधीय पौधों की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग बढ़ने की प्रबल संभावना है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। साथ ही, जंगली जानवरों से अपेक्षाकृत कम नुकसान होने के कारण यह खेती पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प साबित हो सकती है।

यह भी पढ़ें 👉  फाइनेंशियल फ्रॉड यूनिट पिथौरागढ़ ने त्वरित कार्यवाही कर, ठेकेदार से मजदूरों को उनकी मेहनत का पैंसा दिलाया वापस

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जनपद में संचालित निर्यातोन्मुख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा तथा नए निर्यातकों को तैयार करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (MSY) एवं अन्य योजनाओं के माध्यम से निर्यात आधारित इकाइयों को प्राथमिकता प्रदान की जाएगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता प्रमाणन, ऋण सुविधा, विपणन एवं कृषि निर्यात से जुड़ी समस्याओं के समाधान हेतु विभिन्न विभागों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि डीईएच अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा करते हुए आवश्यक सूचनाएं उद्योग निदेशालय को समय पर उपलब्ध कराई जाएं।

यह भी पढ़ें 👉  एस0ओ0जी0 एवं कोतवाली पिथौरागढ़ पुलिस ने 11 ग्राम स्मैक के साथ 01 अभियुक्त को किया गिरफ्तार, तस्करी में प्रयुक्त एक स्कूटी भी की सीज

उन्होंने कहा कि काश्तकारों को उत्पादन से लेकर विपणन तक एक समग्र प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग एवं बाजार से जोड़ने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। तभी अधिक से अधिक काश्तकारों का विश्वास अर्जित कर सकेंगे और उन्हें प्रेरित करते हुए उनकी आय में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित की जा सकेगी।

बैठक में मुख्य शिक्षा अधिकारी तरुण पंत, मुख्य उद्यान अधिकारी अभिनव कुमार, सहायक निदेशक अंकित कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं समिति के सदस्यों ने प्रतिभाग किया तथा जनपद में निर्यात संवर्धन की संभावनाओं पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

To Top