पिथौरागढ़ – रामलीला प्रबन्धकारिणी समिति सदर पिथौरागढ़ द्वारा आयोजित ऐतिहासिक 130वें रामलीला मंचन के सप्तम दिवस जटायु निर्वाण, सीता की खोज, शबरी प्रकरण, सुग्रीव मैत्री, बाली वध और हनुमान जी के लंका प्रस्थान की लीलाओं का मंचन किया गया। रामलीला मैदान में दर्शकों ने उत्साह के साथ इन प्रसंगों का आनंद लिया।
लीला में माता सीता के हरण के बाद श्रीराम और लक्ष्मण उनकी खोज में निकलते हैं। इसी दौरान उन्हें घायल जटायु मिलते हैं, जो रावण से माता सीता को बचाने के लिए संघर्ष करते हैं। जटायु श्रीराम को सीता हरण की जानकारी देते हैं और इसके बाद अपने प्राण त्याग देते हैं। आगे चलकर श्रीराम की भेंट माता शबरी से होती है। शबरी की भक्ति और प्रेम से अभिभूत होकर श्रीराम उन्हें दर्शन देते हैं।
इसके बाद हनुमान जी की मध्यस्थता से श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता होती है। सुग्रीव अपने भाई बाली द्वारा किए गए अन्याय की कथा सुनाते हैं। श्रीराम सुग्रीव की सहायता का वचन देते हैं और बाली वध के प्रसंग का मंचन किया जाता है। इसके बाद सुग्रीव वानर सेना को माता सीता की खोज में जुटने का निर्देश देते हैं।
लीला के अंतिम प्रसंग में श्रीराम हनुमान जी को अपनी मुद्रिका देकर माता सीता की खोज में लंका जाने के लिए प्रस्थान कराते हैं। यह प्रसंग आगामी लीलाओं के प्रति दर्शकों में उत्सुकता जगाता है।



