पिथौरागढ़ : रामलीला प्रबन्धकारिणी समिति पिथौरागढ़ द्वारा आयोजित ऐतिहासिक 130वें रामलीला मंचन के चतुर्थ दिवस राम वनवास प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। लीला में मंथरा-कैकेयी संवाद, दशरथ-कैकेयी प्रसंग, कोप भवन और श्रीराम के वन प्रस्थान की आज्ञा तक की घटनाओं को दर्शाया गया।
मंचन में दिखाया गया कि मंथरा के बहकावे में आकर रानी कैकेयी राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगती हैं। इनमें भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास शामिल होता है। कैकेयी की मांग सुनकर राजा दशरथ व्याकुल हो उठते हैं, लेकिन वचनबद्ध होने के कारण असहाय नजर आते हैं।
जब श्रीराम को वनवास की जानकारी मिलती है, तो वे पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए सहर्ष वन जाने का निर्णय लेते हैं। इस दौरान माता कौशल्या, माता सीता और लक्ष्मण के साथ उनके भावपूर्ण संवादों का मंचन किया गया। लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला के साथ प्रसंग ने भी दर्शकों को भावुक किया। अंत में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण को वन प्रस्थान की आज्ञा मिलने के साथ अयोध्या में शोक का वातावरण छा जाता है। कलाकारों ने अपने अभिनय से इस प्रसंग की मार्मिकता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।



