उत्तराखण्ड

पाला-ग्रस्त सड़कों पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं, दुर्घटना होने पर तय होगी अधिकारियों की जिम्मेदारी- जिलाधिकारी

जिलाधिकारी पिथौरागढ़ आशीष भटगांई ने जनपद में शीतकाल के दौरान पाला गिरने से उत्पन्न हो रही सड़क दुर्घटनाओं की संभावनाओं को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने बताया कि उनके द्वारा पूर्व में लोक निर्माण विभाग (लोनिवि), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), समस्त कार्यदायी संस्थाओं तथा सड़क मार्गों से संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जनपद के समस्त पाला-ग्रस्त (आइसिंग संभावित) स्थलों को तत्काल चिन्हित किया जाए तथा उन स्थलों पर चूना एवं नमक का नियमित रूप से छिड़काव सुनिश्चित किया जाए।

इसके अतिरिक्त, आम जनमानस की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पाला-ग्रस्त मार्गों पर स्पष्ट एवं प्रभावी चेतावनी साइनेज बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। किन्तु जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि निरीक्षण एवं प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह तथ्य संज्ञान में आया है कि संबंधित विभागों — लोनिवि, पीएमजीएसवाई एवं अन्य कार्यदायी संस्थाओं द्वारा दिए गए निर्देशों का गंभीरता से अनुपालन नहीं किया जा रहा है। कई पाला-ग्रस्त सड़क मार्गों पर न तो चूना-नमक का छिड़काव किया गया है और न ही आवश्यक चेतावनी संकेतक लगाए गए हैं, जो स्पष्ट रूप से घोर लापरवाही एवं कर्तव्यहीनता का परिचायक है।

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जिलाधिकारी ने कहा कि शीतकाल के दौरान पाला गिरने से सड़कें अत्यधिक फिसलनयुक्त हो जाती हैं, जिससे आम नागरिकों, वाहन चालकों एवं यात्रियों की जान को सीधा खतरा उत्पन्न होता है। ऐसी स्थिति में जनपद अंतर्गत यदि किसी भी पाला-ग्रस्त सड़क मार्ग पर उचित व्यवस्थाएं न होने के कारण कोई भी दुर्घटना घटित होती है, तो संबंधित विभाग, कार्यदायी संस्था एवं उत्तरदायी अधिकारी को पूर्ण रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

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उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी किसी भी दुर्घटना की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्यवाही, अनुशासनात्मक कार्रवाई एवं उत्तरदायित्व निर्धारण किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही, उदासीनता अथवा निर्देशों की अवहेलना को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि सभी संबंधित विभाग तत्काल प्रभाव से पाला-ग्रस्त स्थलों का पुनः निरीक्षण करें, आवश्यकतानुसार चूना एवं नमक का छिड़काव सुनिश्चित करें, चेतावनी बोर्ड लगाएं तथा इसकी सूचना लिखित रूप में जिला प्रशासन को उपलब्ध कराएं। साथ ही नियमित निगरानी एवं सतत समीक्षा की जाए, जिससे किसी भी प्रकार की जनहानि की संभावना को पूरी तरह से रोका जा सके।

उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई या बहाना किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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