पिथौरागढ़: सिक्किम की दुर्गम और बर्फीली पहाड़ियों में देश की सेवा करते हुए 19 कुमाऊँ रेजिमेंट के वीर जवान विकास कुमार हिमस्खलन (Avalanche) की चपेट में आकर शहीद हो गए। यह अत्यंत दुखद समाचार सामने आते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। जहां एक ओर देश को अपने वीर सपूत पर गर्व है, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने हर आंख को नम कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब जवान ड्यूटी के दौरान गश्त पर तैनात थे और अचानक आए हिमस्खलन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। यह घटना न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जनपद और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि शहीद विकास कुमार अपने बेटे के पहले जन्मदिन पर घर आने वाले थे। आगामी 4 जून को उनका मासूम बेटा पृथ्वीक का पहला जन्मदिन मनाने वाला था, जिसके लिए उन्होंने पहले ही घर आने की योजना बनाई थी। परिवार में खुशियों की तैयारी चल रही थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस पिता का इंतजार घर पर हो रहा था, वह अब तिरंगे में लिपटकर लौटेगा।
शहीद विकास कुमार एक गौरवशाली सैन्य परिवार से संबंध रखते थे। उनके दादा स्वर्गीय हीराराम जी सेना से सेवानिवृत्त रहे, ताऊ स्वर्गीय भवानी राम जी भी सेना से सेवानिवृत्त रहे, चाचा किशोरी लाल भी सेना से सेवानिवृत्त हैं, उनके बड़े भाई वर्तमान में भारतीय सेना में कार्यरत हैं। पीढ़ियों से चली आ रही देशभक्ति की इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विकास कुमार ने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।
बताया जा रहा है कि उनकी शहादत की सूचना पहले कुछ समय तक माता-पिता और पत्नी से साझा नहीं की गई। बाद में जैसे ही यह दुखद खबर परिवार तक पहुंची, पूरे गांव और क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। स्थानीय लोग बड़ी संख्या में शहीद के घर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं और परिजनों को ढांढस बंधा रहे हैं। विकास कुमार का यह बलिदान पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उनका अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति हमेशा याद रखी जाएगी। उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें। इस कठिन समय में पूरा देश परिवार के साथ खड़ा है। बता दे प्राप्त सूचना के अनुसार शहीद विकास का पार्थिव शरीर कल पिथौरागढ़ उनके गाँव गणकोट सुकौली पहुँचने की उम्मीद लगाई जा रही है।