आज तपोवन विद्यास्थली में मदर्स डे के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य माताओं के प्रति सम्मान प्रकट करना तथा परिवार एवं संस्कारों के महत्व को उजागर करना था। विद्यालय परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया था और पूरा वातावरण उत्साह एवं भावनाओं से ओतप्रोत दिखाई दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। दीप प्रज्वलन विद्यालय के संस्थापक एडवोकेट मनोज कुमार जोशी, उनकी धर्मपत्नी कनिका जोशी, विद्यालय के सहसंस्थापक स्वर्गीय ललित मोहन जोशी की धर्मपत्नी ललिता जोशी, विद्यालय की प्रशासनिक अधिकारी श्रीमती निकिता भसीन, सुश्री भारती पाठक, श्रीमती संगीता खत्री, सुश्री तनसी चौहान तथा उपस्थित अभिभावकों द्वारा सामूहिक रूप से किया गया।
तत्पश्चात गणपति वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
इसके बाद बच्चों द्वारा गीत, रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं मातृत्व पर आधारित भावपूर्ण नाटकों का मंचन किया गया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से माँ के प्रेम, त्याग, ममता एवं संघर्ष को अत्यंत संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया। कई प्रस्तुतियाँ इतनी भावुक थीं कि उपस्थित अभिभावक एवं माताएँ भावुक होकर अपनी भावनाएँ रोक नहीं सकीं।
माताओं एवं अभिभावकों के लिए विशेष रूप से विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें चेयर रेस मुख्य आकर्षण रही। इसके साथ ही मम्मियों के लिए आयोजित रैम्प शो ने कार्यक्रम में उत्साह एवं आकर्षण का विशेष वातावरण बना दिया। सभी प्रतिभागियों ने पूरे आत्मविश्वास एवं आनंद के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित माताओं ने “I WILL BE THE BEST MOTHER” की शपथ लेकर बच्चों को श्रेष्ठ संस्कार एवं सकारात्मक वातावरण देने का संकल्प लिया। विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण एवं समस्त अभिभावकों की उपस्थिति में कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्रशासनिक अधिकारी श्रीमती निकिता भसीन द्वारा वोट ऑफ थैंक्स प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय के संस्थापक एडवोकेट मनोज कुमार जोशी ने अपने संबोधन में बच्चों एवं अभिभावकों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि जीवन में माता-पिता के संघर्षों का वास्तविक महत्व अक्सर तब समझ में आता है, जब व्यक्ति स्वयं माँ या पिता बनता है। उन्होंने कहा कि सभी लोग इतने सौभाग्यशाली नहीं होते कि उन्हें अपने माता-पिता के त्याग और संघर्षों को समझने का अवसर मिल सके, क्योंकि कई लोगों के माता-पिता इस अनुभव से पहले ही इस दुनिया से चले जाते हैं।
उन्होंने उपस्थित बच्चों एवं अभिभावकों से आग्रह किया कि जिनके माता-पिता जीवित हैं, वे स्वयं को सौभाग्यशाली समझें तथा अपने माता-पिता के प्रति सदैव प्रेम, सम्मान एवं आदर का भाव रखें। उन्होंने कहा कि माता-पिता का ऋण कभी पूर्ण रूप से चुकाया नहीं जा सकता, फिर भी उनके प्रति स्नेह, सेवा एवं सम्मान व्यक्त करना प्रत्येक संतान का कर्तव्य है।